पटना साइंस कॉलेज- स्वर्णिम अतीत स्याह वर्तमान

पटना साइंस कॉलेज- स्वर्णिम अतीत स्याह वर्तमान

15 नवम्बर, 1928 को तत्कालीन लार्ड इरविन ने की थी स्थापना 

साइंस स्ट्रीम में देश में उच्च शिक्षा का प्रतिष्ठित संस्थान केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई दिग्गजों ने यहां से की है पढ़ाई फिलहाल 100 स्वीकृत पदों के बदले महज 32 शिक्षक हैं कार्यरत

विद्या सागर
पटना (एसएनबी)।
आजादी के पहले से लेकर बाद तक उच्च शिक्षा के साइंस स्ट्रीम में अलग पहचान रखने वाले सूबे के पटना विवि के पटना साइंस कॉलेज का अतित स्वर्णीम रहा है। हालांकि कॉलेज की वर्तमान स्थिति को स्याह ही कहा जा सकता है। शुरूआत में यह पटना विवि के विज्ञान विभाग के रूप में अस्तित्व में आया। इस कॉलेज के नींव का पत्थर 15 नवम्बर, 1928 लार्ड इरविन ने रखा। तब से पटना साइंस कॉलेज भारत में उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान के रूप में जाना गया। राजधानी के अशोक राजपथ पर 28.32 एकड़ जमीन में साइंस कॉलेज का परिसर है। विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिकों और गणितज्ञ के नाम पर कॉलेज में पांच छात्रावास हैं। कॉलेज में दो खेल के मैदान, व्यायामशाला एवं एक मुख्य पुस्तकालय है। पुस्तकालय में विज्ञान और कला से संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तकों का एक समृद्ध और विविध संग्रह है। मुख्य पुस्तकालय के अलावा कॉलेज के सभी विभाग में स्वतंत्र पुस्तकालय हैं। कॉलेज वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान, भूविज्ञान, गणित, भौतिकी, सांख्यिकी और प्राणिशास्त्र बीएससी सम्मान की डिग्री प्रदान करता है। सामान्य विषयों के अलावा विभिन्न व्यावसायिक पाठय़क्रमों में जैव-प्रौद्योगिकी, बीसीए की पढ़ाई होती है। पर्यावरण विज्ञान में भी बीएससी सम्मान विषय की पढ़ाई होती है। प्रत्येक विभाग संबंधित विषयों में अनुसंधान की सुविधा प्रदान करता हैं। वर्तमान में प्रो. उपेन्द्र किशोर सिन्हा महाविद्यालय के प्राचार्य हैं। देश-विदेश में परचम लहरा रहे कॉलेज के छात्र इस महाविद्यालय में पढ़ाई करने वाले छात्र आज देश ही नहीं विदेशों में भी कॉलेज का नाम रोशन कर रहे हैं। प्राचार्य प्रो. यूके सिन्हा ने बताया कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पूर्व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री व राजसभा सांसद डॉ. सीपी ठाकुर, सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, बक्सर से सांसद व भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे, डीजी होमगार्ड अभयानंद, पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. अखिलेश शर्मा, डीआईजी त्रृषिकेश, टाटा फंडामेंटल रिसर्च इंस्टीटय़ूट के निदेशक रतन कुमार सिन्हा, अमेरिका में कार्यरत वैज्ञानिक एनके मिश्रा, आस्ट्रेलिया में कार्यरत वैज्ञानिक राजीव कुमार सिन्हा जैसे अनगिनत शख्श हैं जो देश-विदेश में कॉलेज और सूबे का नाम रोशन कर रहे हैं। 32 शिक्षकों के सहारे चल रहा कॉलेज साइंस कॉलेज ने देश की कई विभूतियों को गढ़ा। विभूतियों को गढ़ने का काम यहां के शिक्षक शुरू से करते आ रहे हैं लेकिन वर्तमान में 32 शिक्षकों के सहारे ही यह कॉलेज चल रहा है। कॉलेज में लगभग एक सौ शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं। शिक्षक सेवानिवृत्त होते गये पर बहाली नहीं हुई। वर्ष 2015 में पांच और शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अगले वर्ष महज 27 शिक्षक ही रह जाएंगे। शिक्षकों की घटती संख्या के कारण कॉलेज से विभूतियों को तैयार करने की रफ्तार लगातार कम हो रही है। जरूरत है कि सरकार कॉलेज पर नजरेइनायत करे और शिक्षक-कर्मचारियों के रिक्त पदों पर बहाली करे। ताकि कॉलेज फिर से पुराने रंग में नजर आये और यहां के छात्र बिहार का नाम देश और दुनिया में रोशन करें।

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