बेटा मिड डे मिल में व्यस्त बाप दारू पीकर मस्त

बेटा मिड डे मिल में व्यस्त बाप दारू पीकर मस्त

मियाद बढ़ने के बाद 17 वें दिन भी औरंगाबाद मंडल कारा में माओवादी बंदियों का धरना जारी

बंदियो ने कहा-सरकार गरीब बच्चों से छीन रही कलम 

विद्या सागर
पटना। बेटा मिड डे मिल में खाने में व्यस्त में है। उसका बाप आज दारू पीकर मस्त है। उक्त बातें आज औरंगाबाद मंडल कारा में विगत 17 दिनों से मणिपुर में लागंू सषस्त्र बंल विषेषाधिकार अधिनियम(अफसपा) को हटाने की मांग को लेकर धरना पर बैठे माओवादी नेता विवके यादव ने कहा। बतातें चलें कि 14 वर्षो से आमरण अनषन कर रही सामाजिक कार्यकर्ता ईरोम शर्मिला के अनषन को समाप्त कराने समेंत 20 सुत्री मांगो को लेकर औरंगाबाद मंडल कारा में कुछ बंदियों द्वारा दिया जा रहे आंदोलन का दूसरे चरण के तीसरे दिन भी बंदियों का धरना जारी रहा। इस प्रकार बंदियों का धरना आज 17 वें दिन भी जारी है। फर्क सिर्फ इतना है कि बंदी अब आंदोलन के दौरान प्रतिदिन एक शाम के भोजन का परित्याग कर रहे हैं। इस कड़ी में बंदियों ने आंदोलन के 17 वें दिन भी जेल के अंदर धरना दिया। इस संबंध में मंडल कारा से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बंदी सुजीत पाठक ने कहा है कि 17 वें दिन धरना पर बैठने वाले बंदियों में प्रमोद मिश्रा, नथुनी मिस्त्री, नेपाली यादव, विवेेेक यादव, मृत्युंजय मिश्रा, अवधेष यादव, रामाषीष दास, बैकुंठ मेहता एवं छोटु रजक शामिल है। धरना को संबांेधित करते हुए वक्ताओ ने इरोम शर्मिला की मांग पर न्यायपूर्ण वार्ता करने की सरकार से मांग की और कहा कि वर्तमान सरकार की षिक्षा नीति गरीब-गुरबों के लिए धोखा व छलावा है। इस षिक्षा नीति में मात्र खानापूर्ति हो रही है और बच्चों के हाथ में स्लेट की जगह प्लेट थमा दिया गया है जिससे बच्चों के व्यक्तित्व पर बुरा असर पड़ रहा है। वहीं हर गांव में दारू की दुकान खुलने से बच्चों के बाप शराब पीकर मस्त हैं और बच्चे मिड डे मील खाने में व्यस्त हैं। इस प्रणाली पर दार्षनिक अरस्तु का दर्षन खरा उतरता नजर आ रहा है कि जिस समाज को सदियों तक गुलाम रखना हो तो उसके हाथ से कलम छिन लो। सरकार ने बच्चों के हाथ में स्लेट के जगह प्लेट पकड़ाकर और बच्चों के बाप को दारू पिलाकर सदियों तक राज करने की मंषा पाल रखी है। इस कारण ऐसी घिनौनी मंषा रखने वाले राजनेताओं को सत्ता से बेदखल कर सामान्य षिक्षा प्रणाली लागू करानी चाहिए जिसमें अमीर-गरीब हर तबके के बच्चों को एक जैसी  क्षा मिले ताकि सबमें बराबरी की भावना जगे। समाज के हर वर्ग के बच्चे को मुस्कुराने का मौका मिले।

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