औरंगाबाद मंडल कारा से पेशी पर आये अधनग्न कैदियों किया प्रदर्शन

औरंगाबाद मंडल कारा से पेशी पर आये अधनग्न कैदियों  किया प्रदर्शन 
ईरोम शर्मिला के समर्थन में चल रहा है बंदियों का आंदोलन
अधनग्न कैदी 

विद्या सागर/मनोज   
पटना/औरंगबाद  । मणिपुर में लागू  सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम(अफसपा) को हटाने की मांग को लेकर 15 वर्षो से आमरण अनषन कर रही सामाजिक कार्यकर्ता ईरोम शर्मिला के अनषन को समाप्त कराने समेंत 20 सूत्री मांगो को लेकर औरंगाबाद मंडल कारा में कुछ बंदियों द्वारा किये जा रहे चैथे चरण के आंदोलन की कड़ी में आज पूर्व धोषणा के अनुरूप पांच बंदी अधनंगें बदन औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में पेषी पर आये। अधनंगें बदन पेषी पर आने वाले बंदियो में सुरेंद्र मेहता, रामप्रवेष यादव, रामजन्म यादव, सुनील खत्री एवं विवेक यादव शामिल है। हालांकि उनकी पूर्व धोषणा के अनुसार चड्ढी-गमछा पर उघारे बदन, सर पर काली पट्टी, ‘‘हम हैं लोकतंत्र का शिकार और यह सरकार है या हत्यारों की जमायत‘ लिखी छाती और पीठ पर दो तख्ती लगाये कोर्ट आने की थी लेकिन पांच कैदियों की आज पेषी के दौरान थोड़ा सा फर्क दिखा। फर्क यह रहा कि बदन तो इनके उधारे थे और ये चड्ढ़ी-गमछे में थे एवं सिर पर काली पट्टी भी थी लेकिन पीठ से धोषणा के अनुरूप नारा लिखी तख्तियां गायब थी। पेषी पर आये कैदी सुरेन्द्र मेहता से जब मीडिया द्वारा यह पूछा गया कि अधनंगें बदन पेषी पर क्यो आये है तो उसने कहा कि वे इरोम शर्मिला के समर्थन में औरंगाबाद मंडल कारा में बंदियो द्वारा किये जा रहे आंदोलन की जमात के बंदी हैं और आंदोलन के चैथे चरण में पूर्व धोषणा के अनुरूप इस तरह से कोर्ट में पेषी पर आये है। यह पूछे जाने पर कि आंदोलन क्यों किया जा रहा है तो उसने एक प्रेस विज्ञप्ति बढ़ा दी जिसपर आंदोलन के 60वे दिन के विवरण दर्ज है। इस बंदी से जब यह पूछा गया कि अफसपा मणिपुर के अलावा और कही भी लागू है क्या, तो उसके द्वारा इसका जवाब नही दिया जा सका। एक और बंदी विवेक यादव से जब यह पूछा गया कि धोषणा के अनुरूप पेशी पर आये उनके समेत पांचो बंदियों के शरीर पर से नारा लिखी तख्तियां क्यो गायब हैं। इस पर उसने कहा कि जेल से वे नारा लिखी तख्तियों को शरीर पर लगाकर चले थेें लेकिन उन्हे पेशी पर लाने वाले पुलिसकर्मियों ने बीच में ही उनसे तख्तियां छीन ली। खैर बंदी  ने औरंगाबाद के ईतिहास में अधनंगें बदन कोर्ट में पेशी  पर आने की नई ईबारत आंदोलन के बहाने जरूर लिख दी हैं।




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