इरोम के समर्थन में चल रहे बंदियों के आंदोलन का होगा विस्तार

इरोम के समर्थन में चल रहे बंदियों के आंदोलन का होगा विस्तार

पेशी पर कोर्ट आए माओवादी नेता प्रमोद मिश्रा ने की घोषणा, कहा- जेलों से बाहर निकल गया है आंदोलन, आंदोलन को दिया जाएंगा अखिल भारतीय स्वरूप


पेशी पर कोर्ट आये माओवादी नेता

औरंगाबाद। औरंगाबाद मण्डल कारा में विचारधीन बंदी के रूप में रहते हुए मणिपुर में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून(अफसपा) को हटाने की मांग को लेकर 15वर्षों से आमरण अनशनरत सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला के समर्थन में आंदोलन कर रहे प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रमोद मिश्रा ने कहा है कि उनका आंदोलन अब औरंगाबाद और राज्य के विभिन्न जेलों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह जन आंदोलन का स्वरूप लेने जा रहा है। आंदोलन के प्रति सरकार द्वारा सुधि नहीं लिए जाने को लेकर पूर्व घोषणा के अनुरूप अधनंगे बदन औरंगाबाद के कोर्ट में पेशी पर आए शीर्ष माओवादी नेता ने कहा कि इरोम के समर्थन में उनके द्वारा आरंभ किया गया आंदोलन जेलों से बाहर आ चुका है और इसके समर्थन में कई संगठन उतर आए है और शीघ्र ही यह आंदोलन अखिल भारतीय स्वरूप ग्रहण कर लेगा। उन्होने कहा कि इरोम और उसके समर्थन में चल रहे आंदोलन की आवाज को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आंदोलनकारियों के संगठन बंदी मुक्ति संघर्ष मोर्चा द्वारा शीघ्र ही एक पत्रिका भी निकाली जाएंगी। श्री मिश्रा ने आंदोलन के 63दिन पूरे होने पर भी सरकार द्वारा नोटिस नहीं लिए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे किसी भी सूरत में आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं है और यह आंदोलन उनकी मांगो के पूरा होने तक जारी रहेगा। इस दौरान उन्होंने आन्दोलन को लेकर खुद के द्वारा प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को लिखे गये पत्र की सैकड़ों प्रतियाँ भी हवा में उछालकर लोगों से इसे पढ़ने और आन्दोलन में सहयोग करने का आह्वान किया। गौरतलब है कि आन्दोलनकारियों द्वारा पूर्व घोषणा के अनुरूप अधनंगे बदन कोर्ट पेषी पर आने का सिलसिला लगातार जारी है और इस सिलसिले का आज चैथा दिन रहा। चैथे दिन श्री मिश्रा के अलावा बंदी अवधेष यादव एवं छोटू रजक भी अधनंगे बदन कोर्ट पेषी पर आये। इसके पूर्व तीसरे दिन 5 बंदी- विवेक यादव, बिंदा सिंह, लल्लू सिंह, रामाषीष दास एवं छोटू रजक अधनंगे बदन पेषी पर आये थे जबकि दूसरे दिन 6 बंदी-विवेक यादव, फिरोज खान, संजय वर्मा, अवधेश यादव, बिंदा सिंह एवं लल्लू सिंह अधनंगे बदन पेषी पर आये थे वहीं पहले दिन अधनंगे बदन पेषी पर आने वाले 5 बंदियों में सुरेंद्र मेहता, रामप्रवेष यादव, रामजन्म यादव, सुनील खत्री एवं विवेक यादव शामिल थे। अदालत में इन बंदियों को पेशी पर लेकर आने के दौरान पुलिसकर्मियों को भी भीड़ को दूर रखने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। पेषी पर आने वाले बंदी चड्ढी-गमछा पर उधारे बदन, सर पर काली पट्टी, ‘‘हम हैं लोकतंत्र का षिकार और यह सरकार है या हत्यारों की जमायत‘ लिखी छाती और पीठ पर दो तख्ती लगाये आये थे। बहरहाल आंदोलन के बहाने कैदी औरंगाबाद के इतिहास में अधनंगें बदन कोर्ट में पेषी पर आने की नई ईबारत जरूर लिख रहे हैं।

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