राज्यपाल का निर्णय अमर्यादित और असंवैधानिक


राज्यपाल का निर्णय अमर्यादित और असंवैधानिक

पटना। नीतीश कुमार का समर्थन कर रहे चार दलों ने रविवार को राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संयुक्त संवाददाता सम्मेलन कर राज्यपाल के निर्णय को अमर्यादित और असंवैधानिक करार दिया और कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल आरएसएस की लठगीरी कर रहे हैं। सारा खेल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर हो रहा है। जदयू, राजद, कांग्रेस और भाकपा के नेताओं ने कहा कि राज्यपाल तत्काल मुख्यमंत्री के निर्णयों और घोषणाओं पर रोक लगाएं, क्योंकि राज्य का खजाना लुटाने के लिए नहीं होता।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि राज्यपाल विधायकों की परेड का मजाक उड़ा रहे हैं। नीतीश कुमार को तत्काल बहुमत साबित नहीं करने देने का उनका फैसला अमर्यादित है। राज्यपाल कह रहे हैं कि नीतीश कुमार उतावलापन दिखा रहे हैं। अपनी राजनीति चमकाने के लिए बयान दे रहे हैं, छटपटा रहे हैं। यही भाषा भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी भी बोल रहे हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री से मिलने के बाद मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने जो बयान दिया था, वैसा ही बयान राज्यपाल दे रहे हैं। आखिर सदन में एक असंबद्ध सदस्य (मांझी) किसका बजट पेश करेगा? ऐसे निर्णय लिए जा रहे और ऐसी घोषणाएं की जा रहीं, जिससे गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न होगा। राज्य का खजाना लुटाने के लिए नहीं होता।
राजद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि प्रचंड बहुमत से नीतीश कुमार को विधायक दल का नेता चुना गया। उसी समय मांझी को इस्तीफा दे देना चाहिए था, लेकिन वह जदयू से असंबद्ध होकर भाजपा-आरएसएस से संबद्ध हो गए हैं।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक चौधरी ने राज्यपाल के निर्णय को असंवैधानिक करार दिया। कहा कि सदन में संयुक्त सत्र से पहले ही उन्हें बहुमत सिद्ध कराने का फैसला लेना चाहिए था। मांझी महादलित कार्ड खेल इमोशनल ब्लैकमेलिंग कर रहे हैं।
भाकपा के जितेंद्रनाथ ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल आरएसएस की लठगीरी कर रहे हैं। चाय वाले को दस लाख का सूट पहनते देख जीतन राम मांझी को भी लालच आ गया है। वे दलितों को अपमानित किए जाने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे खुद दलितों को बेच रहे हैं।

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