सियासत में जिसे देखा वही मादा निकलता है

  • सियासत में जिसे देखा वही मादा निकलता है
    जिन्हे हम भीख देते हैें , वही दादा निकलता हेै
    सभी की देन दारी का तकादा ही निकलता है

    नेता से तो भारत का लवादा ही निकलता है
    ये मुर्दे भी अलग होने की हरदम बात करते हैं
    अब कब्रिस्तान के मुर्दे गढे आघात करते हैं
    ये गलती से उगी फसलें कितनी और काटेंगे
    भारत को ये लावारिस अब कितना और चाटेंगे
    इनका एक ही हल है ,बस खदेडो पाक में इनको
    जो ज्यादा करे हल्ला तो रक्खो ताक में इनको
    ये वो सांप हैे जो दूध पीकर जहर उगलते हेैं
    ये भी हम नही कहते, पूरी दुनिया को खलते हैं
    अभी तो दो चार पागल हैं इनका हल जरूरी है
    इन्हे जड से मिटाने की भी ये हलचल जरूरी हैे
    हिम्मत से करो निर्णय इन्हे जड से हटाने का
    बरसती आग कहती है, ये मौका हेै जलाने का।।

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