मोदी जी वादे पूरे नहीं कर पाए : कन्हैया

आरएसएस हिन्दुओ का भी भला नही चाहता

मेरे पास बैंक में है 200 रूपये, आईफोन तो दूर सिम्पल फोन तक नही रखते

समान स्कूल प्रणाली व सबको रोजगार के लिए देश में छेड़ेंगे आंदोलन

रोहित एक्ट के लिए जारी रहेगी लड़ाई

मोदी जी चुनिंदा उद्योगपतियों को पहुँचा रहे है लाभ 

 विद्या सागर 
पटना | जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ अध्यक्ष व एआईएसएफ नेता कन्हैया कुमार रविवार को पीएम मोदी व आरएसएस पर जमकर बरसे। कन्हैया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना कोई भी वादा पूरा नहीं कर पाए हैं। श्री कुमार ने पटना में एआईएसएफ व एआईवाईएफ द्वारा श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित आजादी कार्यक्रम में कहा कि "महंगाई से कोई राहत नहीं मिली है, न तो लोगों को रोजगार मिला है।" इस कार्यक्रम में कन्हैया को काले झंडे दिखाए गए कन्हैया ने कहा कि बोलने की आजादी उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि मोदी ने दूसरे देशों में जमा काले धन को वापस लाने का वादा किया था और कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपये जमा कराए जाएंगे। कन्हैया ने अपने 80 मिनट के भाषण में कहा, "मैं हर रोज अपना बैंक खाता जांचता हूं, लेकिन मोदी द्वारा वादा किए गए 15 लाख रुपये अभी तक नहीं आए हैं।"
 कन्हैया ने पूछा, "मोदी जी हम आखिर कबतक चुप बैठे रहेंगे और आप के खिलाफ नहीं बोलेंगे।" जिस समय कन्हैया खचाखच भरे एस.के. मेमोरियल हाल में बोल रहे थे, दो युवकों ने काले झंडे लहराए और भारत माता की जय के नारे लगाए। कन्हैया के समर्थकों ने दोनों युवकों की जमकर पिटाई कर दी, जबकि कन्हैया ने ऐसा न करने से समर्थकों से बार-बार अनुरोध किया पुलिस ने युवकों को हिरासत में ले लिया। युथ 4 स्वराज के सदस्य बताए जा रहे थे।
जेएनयू के छात्रनेता ने कहा कि वह किसी भी चीज से भयभीत नहीं हैं। उन्होंने कहा, "चाहे आप मुझ पर जूता फेंकिए या पत्थर या मेरा विरोध कीजिए, मैं बोलता रहूंगा। इस तरह के विरोध से मैं हतोत्साहित नहीं होने वाला।" कन्हैया ने कहा कि "मोदी भक्ति और देशभक्ति" में फर्क करने की आवश्यकता है।  कन्हैया ने कहा कि गरीब जनता को मुश्किल से बैंक ऋण मिल पाता है, सिर्फ पूंजीपतियों को बैंकों से मनचाहा ऋण मिल जाता है। वे ऋण चुकाते भी नहीं और रातोंरात उड़कर लंदन चले जाते हैं।
कन्हैया उद्योगपति विजय माल्या का जिक्र कर रहे थे, जिनके ऊपर बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये ऋण बकाया है और वह इस समय ब्रिटेन में हैं।
उन्होंने कहा कि यह एक अजीब तर्क है कि जहां बिहार जैसे और अन्य राज्यों से कई गरीब छात्र पीएचडी तथा उच्चतर डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों ,उनके लिए खर्च की जाने वाली राशि को सरकार टैक्स की बर्बादी बता रही है। जेएनएसयू के अध्यक्ष ने इशारे में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि टैक्स की बर्बादी वह कर रहे हैं जो लाखों रुपए के सूट पहन कर पूरी दुनिया की सैर करते हैं।
कन्हैया ने कहा कि सरकार मजदूरों के लिए कुछ भी ठोस कार्य नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि मजदूर का स्वरूप अब पहले से बदल गया है। खेत खलिहानों में काम करने वाले मजदूर भले ही भोजपुरी या मगही बोलते हों और कुछ गंदा कपड़ा पहनते हों, लेकिन फैक्ट्री और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले मजदूरों का पोशाक अलग होता है। वे पैन्ट, शर्ट और टाई में दिखते हैं तथा अंग्रेजी भी बोलते हैं, लेकिन उनकी हालत भी मजदूर जैसी ही है। उन्होंने कहा कि वह इन दोनों श्रेणियों के मजदूरों की स्थिति सुधारने की मांग करते हैं। केन्द्र सरकार को बड़ी-बड़ी बाते करने की बजाए आम लोगों की समस्याओं का हल खोजना चाहिए। मजदूर, युवा और किसानों के हितों की रक्षा हर हाल में की जानी चाहिए और इसके लिए वह पूरी मजबूती से आवाज उठाते रहेंगे।
कन्हैया ने कहा कि देश में समान शिक्षा प्रणाली व सबको रोजगार के लिए वे आंदोलन तेज करेगें। नितीश कुमार से मुलाकत में भी वो सूबे में समान शिक्षा प्रणाली लागू करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया की वो इसके लिये लगे हुए है। केंद्र सरकार को वो समान शिक्षा प्रणाली आयोग की रिपोर्ट भेज दिए है।
आरएसएस पर हमला करते हुय कन्हैया ने कहा कि संघ हिन्दुओ की भी भलाई नही चाहता है। अगर सबको शिक्षा व रोजगार मिल जाय तो देश में 70 प्रतिशत हिंदू है सबका भला हो जायेगा। ये हिंदुओ में फुटडलो व राज करो की नीति जो अंग्रेज करते थे उसी पर चल रहे हैं। आजादी के समय हमलोग अंग्रेजो से लड़ रहे थे अब अंग्रेजो के चेले से लड़ रहे है। अंग्रेजो से आजादी मिल गई है। उनके चेलों से भी आजादी ले कर रहेगे।
कन्हैया ने कहा कि वो रोहित एक्ट को लेकर चल रही लडाई को और तेज करेगें। मोदी जी चुनाव के समय हर साल 2 करोड़ लोगो को रोजगार देने का वादा किये थे, दो लाख भी रोजगार नही दे सके। ऊपर से शिक्षा बजट में 17 प्रतिशत कट कर दिया। नन नेट फेलोशिप को बंद कर दिया। तब जाकर हमलोग लड़ना शुरू किये। हमारी लड़ाई किसी विचारधारा या सरकार से नही था। लेकिन खास विचारधारा ने हमसे लड़ना शुरू कर दिया। तब हमलोग उससे और सरकार से लड़ना शुरू किये।
कन्हैया ने कहा  कि आरएसएस देश के तिरंगे झंडे से अशोक चक्र के साथ उजला व हरा पट्टी उतारना चाहता है। वो एक धर्म एक संस्कृति की बात करता है। यह भारत में संभव नही है। यहां अनेकता में एकता है। हम एक रंग का झंडा नही बहुरंगा झंडा देखना चाहते है। तिरंगा झंडा को देखना चाहते है। इसे बचाने के लिये लोगो को आगे आना होगा।
पीएम मोदी पर कन्हैया ने कहा कि वो संसद को मंदिर बनाना चाहते है। मंदिर में महिलाओ का प्रवेश वर्जित है। हम संसद में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण चाहते है। वहां महिलाओ की पूर्ण भगिदारी चाहते है। हम संसद को लोकतंत्र की संस्था बनाना चाहते हैं मंदिर नही। मंदिर में तो दूसरे धर्म वालो को प्रवेश भी नही मिलता है।
अंत में कन्हैया ने कहा कि हमें करिश्माई राजनीति से आजादी चाहिए, मनुष्य मनुष्य का शोषण न करे इससे आजादी चाहिए।
कन्हैया ने आरोप लगाया कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा आम लोगों के हित में खर्च नहीं कर कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों के हितों की रक्षा में लगी है और अब तक अपने वादों को पूरा नहीं कर सकी है। मोदी सरकार आरोप लगा रही है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पीएचडी करने के लिए छात्रों को दी जाने वाली फेलोशीप, जनता के टैक्स की बर्बादी है।
कन्हैया ने कहा, "मैं एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का बेटा हूं और मेरे पिता लकवाग्रस्त हैं। मैं जेनयू के सैकड़ों छात्रों की मदद से किसी तरह गुजारा कर रहा हूं।" उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के सफाईकर्मियों और मैला ढोने वाले एक समूह ने जेएनयू प्रशासन द्वारा उन पर लगाया गया जुर्माना अदा करने के लिए 10,000 रुपये इकठ्ठा किए हैं। कन्हैया ने कहा, "मैंने उन्हें धन्यवाद कहा और बताया कि मैं जुर्माना नहीं दूंगा। उनके द्वारा एकत्रित की गई रकम साबित करती है कि अगर आप किसी लक्ष्य के लिए सही दिशा में कदम बढ़ाएंगे तो इस देश के लोग आपकी मदद के लिए आगे आएंगे। यह भारत की खूबसूरती है।" कन्हैया ने कहा कि उनके बैंक खाते में केवल 200 रुपये हैं। उन्होंने कहा, "कोई भी आरटीआई (सूचना का अधिकार) दाखिल करके मेरे बैंक खाते के बारे में जानकारी ले सकता है।"

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