अंकों के जोड़ में गड़बड़ाया बिहार बोर्ड !

आरटीआई से कॉपी की छायाप्रति मांगने पर सामने आई लापरवाही

वीक्षक ने गणित में दिये 41 की जगह 33 अंक
रिटोटलिंग के लिए आवेदन देने के बाद भी सही से नहीं जोड़ा अंक, 

पूर्व में दिये गये नंबर को ही रिटोटलिंग के बाद भी कर दिया जारी
वर्ष 2015 की मैट्रिक परीक्षा के गणित की कॉपी में नालंदा के हर्षदीप को बोर्ड ने दिये कुल 33 अंक तीन प्रश्नों के सही उत्तर के बाद भी नहीं जोड़ा गया अंक

बोर्ड के सचिव से छात्र ने लगायी गुहार

मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा का रहने वाला है छात्र 

फिर से रिटोटलिंग के लिए खा रहा दर-दर की ठोकरें

 


विद्या सागर
पटना। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति कॉपियों पर दिये गये नंबर को भी जोड़ने नहीं आता है! कॉपियों के मूल्याकंन भी लगता है कि बोर्ड के वीक्षक आंख मूंद कर अपना काम करते हैं। बिहार बोर्ड की यह लापरवाही आरटीआई के तहत मांगी गयी सूचना में सामने आयी है। नालंदा जिले के हिलसा के रहने वाले ब्रज किशोर प्रसाद सिन्हा के पुत्र हर्षदीप ने वर्ष 2015 में मैट्रिक बोर्ड की परीक्षा दी। रिजल्ट प्रकाशित होने के बाद हर्षदीप ने गणित विषय में 33 अंक देखने के बाद बोर्ड में रिटोटलिंग के लिए आवेदन दिया। रिटोटलिंग में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने पूर्व के अंक को ही अंकित करते हुए पुन: रिजल्ट प्रकाशित कर दिया। जिसके बाद हर्षदीप ने परीक्षा समिति से गणित विषय की कॉपी आरटीआई के द्वारा मांगी। पहले तो बोर्ड ने कॉपी देने से इंकार कर दिया। लेकिन राज्य सूचना आयोग के हस्तक्षेप के बाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने कॉपी की छायाप्रति हर्षदीप को भेजी। कॉपी देखने के बाद परीक्षा समिति की कॉपियों के मूल्यांकन पर सवालिया निशान खड़ा हो गया। हर्षदीप को गणित की कॉपी को आईटीआई के द्वारा उपलब्ध करायी गयी है। उसके मुताबिक कॉपी के पहले पन्ने पर विभिन्न प्रश्न पत्रों के लिए दिये जाने वाले नंबर अंकित हैं। जिन प्रश्न पत्रों का सही जबाब अदंर के पन्नों में दिये गये हैं और उनका नंबर भी उस पहले पन्ने पर संबंधित प्रश्न के लिए दिये जाने वाले नंबर में अंकित नहीं है। कॉपी के तीसरे पेज की बात करें तो यहां से हर्षदीप ने उत्तर लिखना आरंभ किया है। पहले सवाल का जबाब वीक्षक ने सही पाया और 1 नंबर दिये। दूसरे सवाल का जबाब भी सही है। इसमें भी नंबर दिये गये है। इसके साथ ही 1 से 17 तक दिये गये सवाल के जावाब भी कई सही हैं, लेकिन मूल्यांकन में वीक्षक ने जो नंबर दिये हैं और जो बोर्ड द्वारा कॉपी की छायाप्रति जारी की गयी है उसमें स्पष्ट तौर पर चार सही सवाल के एवज में 4 नंबर दिये गये हैं। लेकिन पहले पन्ने पर 1 से 17 तक में 3 नंबर ही दिये गये हैं। इसके साथ ही इस पेज की जो छायप्रति जारी की गयी है इसमें कौन से सवाल का जबाब दिया गया है। सवाल का नंबर ही कॉपी की छायाप्रति में नहीं है। बोर्ड की गड़बड़ी यही खत्म नहीं होता। कॉपी के पेज नंबर 12 में प्रश्न 43 के सवाल का जबाब वीक्षक ने सही माना है। इसके लिए 2 नंबर दिये गये हैं। लेकिन प्रथम पेज पर प्रश्न 43 के एवज में दिये गये नंबर को अंकित नहीं किया गया है। इसके साथ ही पेज नंबर 15 पर प्रश्न संख्या 47 का जवाब दिया गया है। इसके लिए विक्षक ने 5 नंबर दिये हैं। लेकिन इसका अंक भी प्रथम पेज पर अंकित नहीं किया गया है। कुल मिलाकर देखे तो तीन ऐसे प्रश्न हैं जिसमें वीक्षक ने स्पष्ट रूप से कॉपी में नंबर दिया है, लेकिन प्रथम पेज जहां अंदर के अंकों को जोड़ा गया है वहां तीन प्रश्न के लिए दिये गये नंबर को अंकित नहीं किया गया। गणित में ऐसे हर्षदीप को 33 नंबर दिये गये हैं। जबकि तीन प्रश्नों के लिए कुल आठ नंबर को रिटोटलींग में भी नहीं जोड़ा गया है। अगर जिन तीन प्रश्नों में स्पष्ट रूप से नंबर दिये गये हैं और उसका नबंर नहीं जोड़ा गया है। उसे जोड़े तो इस छात्र को कुल 41 नंबर मिलेंगे। लेकिन परीक्षा समिति की रिटोटलिंग के नाम पर खानापूरी के कारण हर्षदीप को सिर्फ 33 नंबर ही मिले हैं। हर्ष के पिता ब्रजकिशोर प्रसाद सिन्हा ने बताया कि बोर्ड द्वारा आरटीआई से प्राप्त कॉपी की छायाप्रति के बाद परीक्षा समिति के सचिव को आवेदन दिया गया है। बोर्ड की ऐसी लापरवाही कर उनके बच्चे के भविष्य से खेल रही है।यहां आपको बता दें कि बिहार बोर्ड की कॉपियों में मुल्यांकन में गड़बड़ी का तो यह सिर्फ एक उदाहरण है। हर साल मैट्रिक व इंटर के रिजल्ट के प्रकाशन के बाद रिटोटलींग के लिए छात्र दर-दर की ठोकरें खाते हैं। हर साल बोर्ड ऑफिस के बाहर हंगामा होता है। हंगामे के बाद भी बोर्ड की कार्यशौली में कोई सुधार होता प्रतित नहीं हो रहा है।

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