पुलिस क़ानून को हाथ में लेते हुए मीडियाकर्मियों पर ही शर्मनाक कार्यवाई कर रही है।

हरियाणा की नयी सरकार अपने पहले इम्तिहान में असफल हो गयी है। अदालत की खुलेआम अवमानना हो रही है। पुलिस क़ानून को हाथ में लेते हुए मीडियाकर्मियों पर ही शर्मनाक कार्यवाई कर रही है। बाबा खुद में क़ानून बन गए हैं और हमारा कानून असहाय दिख रहा है। हिसार ज़िले में बरवाला का ये प्रकरण इस बात का सबूत है कि हरियाणा में कानून-व्यवस्था जैसी कोई चीज़ नहीं बची है। हरियाणा सरकार का इस मुद्दे के प्रति रवैये से पुलिस या अदालत ही नहीं, पूरा देश असहाय महसूस कर रहा है।
बरवाला की ये दुर्भाग्यपूर्ण घटना एक गहरी और चिंतित करने वाली बात सामने लाता है। क्यों एक बाबा की गिरफ्तारी को इतना बड़ा स्वरुप दे दिया गया है? वोट-बैंक की राजनीति के नाम पर बाबाओं से पार्टियों के गठबंधन का कानून-व्यवस्था पर क्या प्रभाव पर सकता है?
अदालत का सहयोग कर रहे वक़ील ने भी राज्य सरकार के आचरण पर सवाल उठाते हुए सचेत किया था कि सरकार जिस तरह इस मुद्दे को संभाल रही है उससे अराजकता और अव्यवस्था का माहौल बनेगा। रविवार को जब बाबा रामपाल की गिरफ्तारी हो जानी चाहिए थी तो सरकार ने शाम 7:30 बजे पुलिस बल में ही कमी कर दी थी। इस बात का ज़िक्र अदालत को पेश किये हलफनामे में सरकार ने नहीं किया है। वकील साब ने यह भी कहा था कि पुलिस एवं नागरिक प्रसाशन के मुखिया होने के नाते हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर - जोकि राज्य के गृह-मंत्री भी हैं - से अदालत को स्पष्टीकरण मांगना चाहिए।
आज बरवाला के सतलोक आश्रम से जो हिंसा की खबरें आ रही हैं वो दुखद है। राज्य सरकार संविधान और जनता के प्रति अपने दायित्व को समझे, इस घटना की ज़िम्मेदारी ले और बाबाओं के प्रति अपनी नीति स्पष्ट करें।

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