इरोम के समर्थन में आन्दोलन कर रहे सभी बंदियों को मिले राजनीतिक बंदी का दर्जा: सोमप्रकाश

इरोम के समर्थन में आन्दोलन कर रहे सभी बंदियों को मिले राजनीतिक बंदी का दर्जा: सोमप्रकाश 

 

औरंगाबाद। बिहार राज्य निर्माण श्रमिक कल्याण संघ के अध्यक्ष एवं ओबरा के निर्दलीय विधायक सोमप्रकाश सिंह ने मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला के 15 वर्षों से जारी आमरण अनशन के समर्थन में औरंगाबाद समेत राज्य के विभिन्न जेलों में आन्दोलन कर रहे बंदियों को राजनैतिक बंदी का दर्जा देने की मांग की है। श्री सिंह ने औरंगाबाद मंडल कारा जाकर आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता माओवादी नेता प्रमोद मिश्रा से मुलाकात कर बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान यह मांग उठायी। उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे को राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों को उठाना चाहिए था उस मुद्दे को बंदियों ने उठाकर समाज की आँखें खोलने का काम किया है और वे इस आन्दोलन का हर स्तर पर समर्थन करते हैं। श्री सिंह ने कहा कि बंदियों की सभी मांगें जनपक्षीय हैं और इन मांगों को पूरा करने के लिए सरकार एक उच्च स्तरीय कमिटी गठित करे और यह कमिटी आन्दोलनकारियों से वार्ता कर उनके द्वारा उठाये जा रहे 20 सूत्री मांगों का सम्मानजनक हल निकाले। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे इस आन्दोलन को और आगे बढ़ाने में आन्दोलनकारियों के कंधे से कंधा मिलाकर साथ देंगें। विधायक ने कहा कि बंदी होने का मतलब यह नहीं होता है कि उनके संवैधानिक अधिकार समाप्त हो गये हैं और बंदी संविधान प्रदत्त अधिकार के तहत आन्दोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे भी सशस्त्र बल विषेषाधिकार अधिनियम (अफसपा) को हटाये जाने के पक्षधर हैं और इस कानून को हटाया ही जाना चाहिए। इस कानून को हटाये जाने में ही मणिपुरी लोगों की बेहतरी छिपी है और बंदी इसी बेहतरी के आकांक्षी हैं। श्री सिंह ने आन्दोलन के 63 दिन पूरे होने के बावजूद सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा आन्दोलन की सुधी नहीं लिए जाने के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय होने के साथ ही लोकतंत्र के लिए अभिशाप है। आन्दोलन कर रहे बंदी भिन्न-भिन्न विचारधारा के लोग हैं और इस आन्दोलन को नक्सलियों का आन्दोलन कहकर उनके आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने बंदियों के समर्थन में संयुक्त वाम मोर्चा द्वारा किये जा रहे आन्दोलन का भी समर्थन करते हुए कहा कि राजनैतिक आन्दोलनकारी एवं बंदियों को राजनीतिक बंदी का दर्जा दिलाने के लिए वे आवाज बुलंद करेगे  क्योंकि यह व्यवस्था और सिद्धांतों से जुड़ा आन्दोलन है।



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