विधायक सोमप्रकाश के पहल पर माओवादी नेता प्रमोद मिश्रा ने तोड़ा मौन

विधायक सोमप्रकाश के पहल पर माओवादी नेता प्रमोद मिश्रा ने तोड़ा मौन

4 दिनों के अनशन के बाद किया जल ग्रहण, इरोम के समर्थन में आन्दोलन पर डटे रहने का फैसला

औरंगाबाद। मणिपुर में लागू अफसपा कानून को हटाने की मांग को लेकर 15 वर्षों से अनशनरत सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला के समर्थन में चल रहे आन्दोलन की कड़ी में मौन व्रत रखते हुए पेय जल का त्याग करने के फैसले को माओवादी नेता प्रमोद मिश्रा ने समाप्त कर दिया है। मंडल कारा में 4 दिनों तक मौन साधे रहने के दौरान जल ग्रहण नहीं कर रहे श्री मिश्रा से आज ओबरा के निर्दलीय विधायक सोमप्रकाश सिंह, भ्रष्टाचार प्रतिरोध संघर्ष मोर्चा के संस्थापक आलोक कुमार, बंदी अधिकार आन्दोलन के संयोजक संतोष उपाध्याय, विधायक प्रतिनिधि कुमुद रंजन एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुचित मिश्रा ने जेल के अन्दर जाकर मुलाकात की। मुलाकात के दौरान आरंभिक क्षणों में इन नेताओं के बीच लिखित रूप में बातें हुई। इस दौरान नेताओं ने कहा कि वे उनके आन्दोलन का सम्मान करते हैं और उनकी सभी मांगें जायज हैं लेकिन इन मांगों को लेकर अभी लम्बी लड़ाई लड़नी है तभी सरकार मांगों को पूरा करेंगी। इस नाते उनका स्वस्थ रहना जरूरी है और वे स्वस्थ तभी रहेंगे जब जल ग्रहण करते रहेंगे। नेताओं की इन बातों को स्वीकार करते हुए श्री मिश्रा मौन व्रत को तोड़ते हुए जल ग्रहण करने पर राजी हो गये। मौन व्रत तोड़ने के बाद श्री मिश्रा ने कहा कि पूर्व की भांति वे अपने आन्दोलन पर कायम हैं और पूर्व की भांति अब वे अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। इसके बदले में वे प्रतिदिन दोनों शाम नींबू, नमक, चीनी का घोल ग्रहण करेंगे। हालांकि श्री मिश्रा के इस फैसले से भी उन्हें शारीरिक नुकसान ही पहुंचेगा और उनके स्वास्थ्य में गिरावट आयेगी। इसका हल निकालने के लिए विधायक ने उनके आन्दोलन को बिहार विधानसभा के आरंभ होने वाले बजट सत्र में उठाने की घोषणा की है। साथ ही आन्दोलन के प्रत्येक बिंदु को विभिन्न मंचों के माध्यम से लगातार उठाने का भी उन्होंने ऐलान किया है।

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