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पटना यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में गोलीबारी, एक घायल

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पटना यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में गोलीबारी, एक घायल   पटना। पटना यूनिवर्सिटी के बहादुरपुर स्थित सैदपुर हॉस्टल में गोलीबारी से एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। छात्रों को दो गुटों के बीच हुई तकरार में घटना हुई। गोलीबारी की सूचना पर पहुंची पुलिस नें घायल को अस्पताल भेजा और आरोपियों की तलाश कर रही है। सैदपुर हॉस्टल और कुछ बाहरी छात्रों के बीच कुछ समय से किसी बात को लेकर तनातनी चल रही थी। इसी को लेकर एक गुट ने देर शाम हॉस्टल में धावा बोला। दोनों ओर से देखते ही देखते मारपीट होने लगी। बताया जाता है की इसी बीच एक गुट ने फायरिंग कर दी, जिसके चलते दूसरे गुट ने भी असलाहा निकाल लिया और निशाना साधकर फायरिंग करने लगे। करीब दस मिनट तक दोनों ओर से फायरिंग होती रही, इसी बीच शिवम नाम के छात्र को गोली लग गई। गोली लगने की सूचना जैसे ही दूसरे गुट को लगी वे फरार हो गए। तभी पहुंची पुलिस ने घायल शिवम को अस्पताल भेजा। आरोपियों की तलाश की जा रही है।

बंदियों से वार्ता करने जेल पहुंचे एडीएम

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बंदियों से वार्ता करने जेल पहुंचे एडीएम औरंगाबाद। मंडलकारा में अनशन एवं आंदोलन कर रहे बंदियों से वार्ता के लिए गुरुवार रात्रि एडीएम सुरेश प्रसाद साह पहुंचे। आंदोलन कर रहे बंदियों से वार्ता की। अनशन पर बैठे बंदी प्रमोद मिश्रा से बात की। साथ में डीएम के गोपनीय प्रभारी मुकेश कुमार मुकुल एवं जेल अधीक्षक तेजनारायण राय थे। अधिकारियों ने प्रमोद से कहा कि आपके मांग पत्र को मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री तक भेज दिया गया है। बंदियों की अधिकतर मांगों पर निर्णय लेने का अधिकार राज्य एवं केंद्र सरकार को है। मांगों पर जिला प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है। बंदियों की मांग पर अधिकारियों ने कहा कि पुलिस पदाधिकारियों पर जो आरोप लगाया गया है उसका लिखित आवेदन डीएम के नाम से दें, जांच कर कार्रवाई की जाएगी। एडीएम से प्रमोद मिश्रा ने कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी विलंब से वार्ता करने आए हैं। बात को सुन एडीएम ने कहा कि कारा अधीक्षक जेल प्रशासन के ही प्रतिनिधि हैं, जो लगातार बंदियों से वार्ता कर रहे हैं। अधिकारियों ने अनशन पर बैठे एवं आंदोलनरत बंदियों से अपना आंदोलन समाप्त करने का आग्रह...

ख़ून का जवाब स्याही से

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ख़ून का जवाब स्याही से 8 जनवरी 2015 पेरिस में शार्ली एब्डो पत्रिका के दफ़्तर पर हमले में 12 लोगों की हत्या के बाद दुनियाभर में लोगों ने कार्टून बनाकर रोष जताया है. मरने वाले पत्रकारों के लिए लोग सड़कों पर उतरे और उनके समर्थन में चित्र हाथों में लेकर खड़े दिखे. फ़्रांस के वाणिज्य दूतावास के सामने कई समर्थकों ने मारे गए लोगों के समर्थन में पेंसिल पर केंद्रित कई चित्र दिखाकर अपने दुख और हिम्मत का मुज़ाहिरा किया. तस्वीर में जहां हमलावर को बंदूक़ ताने दिखाया गया है, वहीं एक व्यक्ति को पेंसिल ताने दिखाया गया है. एक महिला बहुत ही सरल चित्र हाथ में लिए खड़ी दिखी, जिसमें बंदूक़ का मुक़ाबला पेंसिल कर रही है. अर्जेंटिना में फ़्रांसीसी दूतावास के बाहर लटकी यह कार्टूननुमा तस्वीर कार्टूनिस्ट की हत्या पर विरोध दर्ज करती दिखी. लोगों ने न सिर्फ़ सरकारी दफ़्तरों के बाहर कार्टून लगाए बल्कि अमरीका तक में लोगों ने चित्रों के ज़रिए अपनी भावनाएं बयां कीं. कैलीफ़ॉर्निया में चित्र के ज़रिए मरने वाले पत्रकारों के लिए अपनी संवेदना व्यक्त करती मह...

इरोम के समर्थन में चल रहे बंदियों के आंदोलन का होगा विस्तार

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इरोम के समर्थन में चल रहे बंदियों के आंदोलन का होगा विस्तार पेशी पर कोर्ट आए माओवादी नेता प्रमोद मिश्रा ने की घोषणा, कहा- जेलों से बाहर निकल गया है आंदोलन, आंदोलन को दिया जाएंगा अखिल भारतीय स्वरूप पेशी पर कोर्ट आये माओवादी नेता औरंगाबाद। औरंगाबाद मण्डल कारा में विचारधीन बंदी के रूप में रहते हुए मणिपुर में लागू सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून(अफसपा) को हटाने की मांग को लेकर 15वर्षों से आमरण अनशनरत सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला के समर्थन में आंदोलन कर रहे प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रमोद मिश्रा ने कहा है कि उनका आंदोलन अब औरंगाबाद और राज्य के विभिन्न जेलों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह जन आंदोलन का स्वरूप लेने जा रहा है। आंदोलन के प्रति सरकार द्वारा सुधि नहीं लिए जाने को लेकर पूर्व घोषणा के अनुरूप अधनंगे बदन औरंगाबाद के कोर्ट में पेशी पर आए शीर्ष माओवादी नेता ने कहा कि इरोम के समर्थन में उनके द्वारा आरंभ किया गया आंदोलन जेलों से बाहर आ चुका है और इसके समर्थन में कई संगठन उतर आए है और शीघ्र ही यह आंदोलन अखिल भारतीय स्वरूप ग्रहण कर लेगा। उन्हो...

कार्टूनिस्ट, जो था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे बड़ा पैरोकार

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कार्टूनिस्ट, जो था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे बड़ा पैरोकार कार्टूनिस्ट, जो था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे बड़ा पैरोकार पेरिस। आतंकी हमले में चार्ली एब्दो के संपादक और ख्यात कार्टूनिस्ट स्टीफेन कारबोनियर की भी मौत हो गई। दरअसल, आतंकियों के निशाने पर सबसे पहले स्टीफेन ही थे। कारण भी साफ है। स्टीफेन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सबसे बड़े पैरोकार थे। वे अपनी लकीरों के माध्यम से धर्म और राजनीति समेत समाज के हर पहलू पर निशाना साधते थे। इसके चलते उन्हें कई बार धमकियां भी मिलीं, लेकिन तमाम खतरों के बावजूद वे मैग्जीन की रीति-नीति बदलने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा था कि घुटनों के बल जीने के बजाय खड़े रहकर मरना पसंद करुंगा...और आखिरी में ऐसा हुआ। कथिततौर पर इस्लाम विरोधी कार्टून बनाने पर मिली धमकियों के बाद उन्होंने 2012 में एसोसिएट प्रेस से साफ कहा था, मैं फ्रांसीसी कानून के तहत रहता हूं, न कि कुरान के कानून के तहत। स्टीफेन कई चरमपंथी गुटों के साथ-साथ अलकायदा के भी निशाने पर भी थे। अलकायदा की हिट लिस्ट में वह नौवें नंबर पर थे। यह लिस्ट इस संगठन की...

पेरिस में आतंकी हमले में संपादक सहित 12 पत्रकारों की मौत

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पेरिस में आतंकी हमले में संपादक सहित 12 पत्रकारों की मौत फ्रांस की राजधानी पेरिस में मीडिया पर हुए आतंकी हमले से पूरी दुनिया हिल गई है। तीन आतंकियों ने फ्रेंच मैगजीन शार्ली ऐब्दो पर हमला करके मैगजीन के संपादक समेत 10 पत्रकारों को मार डाला। हमले में दो पुलिस वालों समेत कुल 12 लोग मारे गए हैं। पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस में मीडिया पर हुए आतंकी हमले से पूरी दुनिया हिल गई है। तीन आतंकियों ने फ्रेंच मैगजीन शार्ली ऐब्दो पर हमला करके मैगजीन के संपादक समेत 10 पत्रकारों को मार डाला। हमले में दो पुलिस वालों समेत कुल 12 लोग मारे गए हैं। माना जा रहा है कि तीनों हमलावरों का संबंध किसी जेहादी आतंकी संगठन के साथ हो सकता है। हमलावरों ने मैगजीन के दफ्तर में हमले के वक्त अल्ला- हू -अकबर के नारे लगाए थे, 50 राउंड से ज्यादा की फायरिंग की और वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार भी हो गए। हमले के बाद पूरे फ्रांस में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। फ्रांस के गृहमंत्री का कहना है कि तीनों आतंकियों की तलाश जारी है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना की राष्ट्रपति और प्रधा...

इरोम के समर्थन में आन्दोलन कर रहे सभी बंदियों को मिले राजनीतिक बंदी का दर्जा: सोमप्रकाश

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इरोम के समर्थन में आन्दोलन कर रहे सभी बंदियों को मिले राजनीतिक बंदी का दर्जा: सोमप्रकाश    औरंगाबाद। बिहार राज्य निर्माण श्रमिक कल्याण संघ के अध्यक्ष एवं ओबरा के निर्दलीय विधायक सोमप्रकाश सिंह ने मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला के 15 वर्षों से जारी आमरण अनशन के समर्थन में औरंगाबाद समेत राज्य के विभिन्न जेलों में आन्दोलन कर रहे बंदियों को राजनैतिक बंदी का दर्जा देने की मांग की है। श्री सिंह ने औरंगाबाद मंडल कारा जाकर आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता माओवादी नेता प्रमोद मिश्रा से मुलाकात कर बाहर आने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान यह मांग उठायी। उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे को राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों को उठाना चाहिए था उस मुद्दे को बंदियों ने उठाकर समाज की आँखें खोलने का काम किया है और वे इस आन्दोलन का हर स्तर पर समर्थन करते हैं। श्री सिंह ने कहा कि बंदियों की सभी मांगें जनपक्षीय हैं और इन मांगों को पूरा करने के लिए सरकार एक उच्च स्तरीय कमिटी गठित करे और यह कमिटी आन्दोलनकारियों से वार्ता कर उनके द्वारा उठाये जा रहे 20 सूत्री मांगों का सम्मानजनक हल निकाले। उन्होंने च...